Sunday, January 14, 2007

And The Failure Persists!!!!

मेरा भी एक स्वप्न था,
मेरी भी थी एक चाहत,
न सोचा था खो जाएगा सुकून,
गुम हो जायेगी राहत !!!

रास अब ना आ रहा,
जीवन का ये फ़ल्सवान,
थी तमन्ना आरजू,
जिवुंगा जिंदगी ज़वा!!!

पहले भी जीवन न आसां था,
पहले भी ग़म थे मेरे पास,
किंतु उस पिछडे ग़म के साथ,
एक अनंत खुशी का था एहसास!!!

क्या सोचा था क्या हो गया,
टुटा गुरूर और स्वाभिमान,
हाले दिल क्या बयान करू,
बदन तोह है पर है ना जान!!!

नींद ना आती है पर,
अपने दिल को है सुला दिया,
अब मेरे पीड़ित मन ने,
स्वप्न गढ़ना ही भुला दिया!!!!












This poem was written by me long back after my failure in JEE-03!!! And after CAT-06, this seems to be the perfect time to post this one.
But, the hope is still on coz i believe:
"मनुष्य को चाहिए परिश्तिथियों से झुझे, लर्रे,
एक स्वप्न टूटे तोह दूसरा गरडे !!"